क्या हम खुद को दूसरे से बहेतर समजते है?
आज कल इतना कॉम्पिटिशन औऱ दौड़ चल रही है कि लोग एक दूसरे के फीलिंग्स की कदर करना ही भूल गए है। एक दूसरे को प्रोतसाहन देने के बजह वह एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे है। ऐसी कौनसी दौड़ में भाग रहे है? पता नही? कि दूसरे से में बहेतर हु और मेरे जैसा औऱ कोई नही यह झुठ में जी रहे है। शायद यह झूठे घमंड के कारण। शायद अपनी बड़ाई हो इस लिये। शायद मुझसे कोई आगे चला न जाये इस कारण। आप सभी ने तो खेकड़ो की आदत देखी ही होगी। अगर मुझे आगे बढ़ना है तो दूसरे का पैर नीचे खीचना ही पड़ेगा। इस कारण वह कोई भी अपने मकसद तक नही पहोच सकता। इस से क्या उनका भाईचार अच्छा बना रहेगा।नही बिल्कुल नही। मुझे लगता है की परमेश्वर की यह इच्छा नही है। बिल्कुल नही है। वह हमेशा चाहता है कि हम एक दूसरे को अपने से बेहतर समजे। एक दूसरे की मदत करे। कौनसी बात के लिये हमें ऐसा व्यहवार करना है? यह सब शरीर के कारण ही करते है ना? की हमे सारि चीजे अछि मिले। हम सुकून से रहे।पर यह बात तो तय है कि हम ...