बेफिकर जिना (क्योंकि जो आज है वह फिर नही आयेगा)

इंसान कितना सोचता है कि कल क्या होगा? हमारा भविष्य क्या होगा? मेरे परिवार का क्या होगा? गरीब भी यही सोचता है और आमिर भी यही सोचता है की मेरे पास जो है वह कल मेरे साथ रहेगा क्या नही ??? 
इतने सारे सवाल हर एक मनुष्य के दिमाग मे घूमते ही रहते है। पर इस सारी चिंता से क्या हम आज जो जीवन है उसे खुल कर जी रहे है? बिंदास्त तरीके से जी रहे है? 
नही बिल्कुल नही उसके विरुद्ध हम और सोचते है क्योंकि जैसे दुनिया चल रही है वैसे ही हम को करना है यह हमारी सोच हो गई है। जो चिन्ता नही करता वो जिम्मेदार व्यक्ति नही होता समाज के सोच में। समाज औऱ लोगो के दबाव में कुछ लोग अपने भविष्य के लिए गलत निर्णय ले लेते है। और जो उनका आज है उसे जीना छोड़ देते है और जीवन के ऐसे चक्रविहव में फस जाते है जहाँ से से निकलना मुश्किल है।
पर कभी हमने सोचा है कि इन आकाश के पंछियों को देख कर ना वो काम करते है ना चिन्ता करते है  तो भी ऊपर वाला उनको संभालता है और उनकी देखभाल करता है। हम तो उनसे भी खास है । तो आपको नही लगता ऊपरवाला हमारी भी देखभाल करेगा। 
कल का दिन कल ही देखा जाएगा उसके लिए हम हमारा आज क्यों खराब करें। बेफिकर बिना चिन्ता किये हमे हमारा जीवन जीना चाइये। उन्ह आज़ाद पंछियों के जैसे जो आज के लिए जी रहे है आजादी के साथ।

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